राष्ट्रीय पोषण अभियान: भारत में कुपोषण से मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
भारत में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan) की शुरुआत की है। यह अभियान विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और 6 वर्ष तक के बच्चों के पोषण स्वास्थ्य में सुधार के लिए लक्षित है।
📅 महत्वपूर्ण तिथियाँ:
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आरंभ: 8 मार्च 2018, राजस्थान में
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विशेष माह: सितंबर को 'पोषण माह' के रूप में मनाया जाता है
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पोषण पखवाड़ा: अप्रैल 8 से 22, 2025 तक
🎯 मुख्य उद्देश्य:
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कुपोषण में कमी: बच्चों में कुपोषण की दर में कमी लाना
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एनीमिया मुक्त भारत: गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया की दर में कमी लाना
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समानता: सभी वर्गों तक पोषण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना
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संचार और जागरूकता: पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना
📱 डिजिटल पहल:
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पोषण ट्रैकर ऐप: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए पोषण ट्रैकर ऐप की शुरुआत की गई है, जो पोषण सेवाओं की निगरानी और वितरण में सहायता करता है।
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जन आंदोलन: पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जन आंदोलन (Jan Andolan) की पहल की गई है, जिसमें समुदायों को शामिल किया जाता है।
📊 उपलब्धियाँ:
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लाभार्थियों की संख्या: 10 करोड़ से अधिक लाभार्थी
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वित्तीय सहायता: मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत 94,698.59 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है
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एनीमिया नियंत्रण: गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को 180 आयरन और फोलिक एसिड की गोलियाँ वितरित की गई हैं
🧑🤝🧑 सामुदायिक भागीदारी:
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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर पोषण सेवाओं की जानकारी और रेशन वितरित करते हैं।
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सामुदायिक कार्यक्रम: 'गोदभराई' और 'अन्नप्राशन' जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाती है।
🌐 विशेष राज्यों में फोकस:
विशेष रूप से उन राज्यों में जहां बच्चों में कुपोषण और महिलाओं में एनीमिया की दर अधिक है, जैसे:
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उत्तर प्रदेश
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बिहार
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मध्य प्रदेश
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राजस्थान
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तमिलनाडु
📺 टीवी और रेडियो पर जागरूकता अभियान:
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टीवी और रेडियो विज्ञापन: पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में टीवी और रेडियो विज्ञापनों का प्रसारण किया जाता है।
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मोबाइल संदेश: पोषण से संबंधित संदेशों को मोबाइल के माध्यम से भी प्रसारित किया जाता है।
🏁 निष्कर्ष:
राष्ट्रीय पोषण अभियान भारत में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से सरकार ने पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने और समुदायों को सक्रिय रूप से शामिल करने की दिशा में कई पहल की हैं। इस अभियान के माध्यम से हम एक स्वस्थ और समृद्ध भारत की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
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